PM-VBRY योजना से दो वर्षों में 3.5 करोड़ रोजगार सृजन का लक्ष्य

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने रोजगार सृजन को बढ़ावा देने और औपचारिक क्षेत्र में नौकरियों की संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) शुरू की है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस महत्वाकांक्षी रोजगार-आधारित प्रोत्साहन योजना को 1 जुलाई 2025 को मंजूरी दी थी, जबकि इसका क्रियान्वयन 1 अगस्त 2025 से शुरू किया गया। योजना का संचालन श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के माध्यम से किया जा रहा है।

करीब 99,446 करोड़ रुपये के बजट वाली इस योजना का लक्ष्य दो वर्षों में देशभर में 3.5 करोड़ से अधिक नए रोजगार सृजित करना है। योजना के लाभ 1 अगस्त 2025 से 31 जुलाई 2027 के बीच सृजित होने वाली नौकरियों पर लागू होंगे। सरकार का मानना है कि यह पहल रोजगार आधारित विकास को गति देकर देश की आर्थिक प्रगति को मजबूत आधार प्रदान करेगी।

यह योजना दो भागों में विभाजित है। योजना का पहला भाग (Part-A) पहली बार औपचारिक क्षेत्र में नौकरी पाने वाले कर्मचारियों पर केंद्रित है, जबकि दूसरा भाग (Part-B) नियोक्ताओं को प्रोत्साहन देने के लिए तैयार किया गया है।

योजना के तहत अगस्त 2025 से जुलाई 2027 के बीच किसी भी ईपीएफओ-पंजीकृत संस्थान में पहली बार नौकरी करने वाले ऐसे कर्मचारी पात्र होंगे, जिनका मासिक वेतन एक लाख रुपये से कम है। पात्र कर्मचारियों को एकमुश्त प्रोत्साहन राशि दी जाएगी, जो उनके एक महीने के ईपीएफ वेतन (मूल वेतन और महंगाई भत्ता) के बराबर होगी। यह राशि अधिकतम 15 हजार रुपये तक होगी।

यह प्रोत्साहन दो किश्तों में दिया जाएगा। पहली किश्त छह महीने की निरंतर सेवा पूरी करने के बाद मिलेगी, जबकि दूसरी किश्त 12 महीने की सेवा पूरी करने और ईपीएफओ पोर्टल पर उपलब्ध वित्तीय साक्षरता (Financial Literacy) का ऑनलाइन पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद प्रदान की जाएगी।

सरकार ने कर्मचारियों में बचत की आदत को बढ़ावा देने के लिए दूसरी किश्त को एक निश्चित अवधि के लिए बचत साधन में रखने का प्रावधान भी किया है, जिससे कर्मचारियों को भविष्य के लिए आर्थिक सुरक्षा का आधार मिल सके।

सीओओ (स्टाफिंग), नेटएम्बिट के धीरज गोसाई ने प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) को एक बेहद सकारात्मक पहल बताया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विकसित भारत के लक्ष्य को लेकर लगातार काम कर रहे हैं और रोजगार सृजन तथा कौशल विकास इस लक्ष्य को हासिल करने के प्रमुख आधार हैं।

धीरज गोसाई ने कहा कि इस योजना को लेकर कर्मचारियों और नियोक्ताओं, दोनों के बीच उत्साह का माहौल है। उन्होंने कहा कि सरकार ने वर्ष 2027 तक 3.5 करोड़ रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा है, जो देश के रोजगार परिदृश्य में बड़ा बदलाव ला सकता है।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में विभिन्न उद्योगों में बड़ी संख्या में फ्रेशर्स की भर्ती की जा रही है और कंपनियां नए प्रतिभाशाली युवाओं को रोजगार देने के लिए उत्साहित हैं। उनके अनुसार, योजना के तहत कर्मचारियों को मिलने वाले प्रोत्साहन का लाभ भी सकारात्मक प्रभाव डाल रहा है, जिससे नौकरी के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। धीरज गोसाई ने कहा कि इस योजना के कारण बाजार में सकारात्मक माहौल बना है और रोजगार क्षेत्र में नई ऊर्जा देखने को मिल रही है।

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